विचार संयम ही नहीं वाणी संयम भी (Not only thought control but speech control is essential too !)

Published on January 24th, 2012

विचार संयम ही नहीं वाणी संयम भी

 

अहंता का नियंत्रण (Keep ego under proper control)

Published on January 18th, 2012

अहंता का नियंत्रण

 

तृष्णा और मोह (Craving and undue attachment)

Published on January 10th, 2012

तृष्णा और मोह

 

काँटे से काँटा निकाला जाए (Let intellectualism have a taste of its own medicine !)

Published on January 8th, 2012

काँटे से काँटा निकाला जाए

 

संयम को सार्थक दिशा दें (Channelize self-control in a meaningful direction)

Published on January 6th, 2012

संयम को सार्थक दिशा दें

 

आस्थाओं के सहारे आस्थाओं को उभारा जाए (Utilise faith to evolve faith!)

Published on January 4th, 2012

आस्थाओं के सहारे आस्थाओं को उभारा जाए

 

ईश्वर के भौतिक स्वरूप (The Physical Form of the God)

Published on January 2nd, 2012

ईश्वर के भौतिक स्वरूप

 

भाग्यवाद की आवश्यकता किस लिए ? (What is the need to believe in destiny ?)

Published on December 31st, 2011

भाग्यवाद की आवश्यकता किस लिए ? एक ही औषधि हर मर्ज पर हर व्यक्ति के लिए काम नहीं आ सकती । इसी प्रकार परिस्थितियों के अनुरूप अनेक सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है । भाग्यवाद का सिद्धांत भी एक ऐसा ही प्रयोग है जो केवल तब काम में लाया जाता है, जब मनुष्य के पुरुषार्थ

(More)…

 

धर्म की आवश्यकता आज अधिक है (The Religious Approach is Needed More Today than Ever before)

Published on December 20th, 2011

धर्म की आवश्यकता आज अधिक है

 

विभूतिवान लोकरंजन में नहीं सृजन में लगेंगे (The Genius will engage in Development, Not in Mass Entertainment )

Published on December 16th, 2011

विभूतिवान लोकरंजन में नहीं सृजन में लगेंगे साहित्यकार अगले दिनों लोकरंजन के लिए नहीं लिखेंगे । उन्हें माता सरस्वती से वेश्यावृति कराने में ग्लानि अनुभव होगी और कलम का उपयोग जनमानस को पाप पंक में धकेलते हुए उनकी आत्मा रोयेगी । आत्मग्लानि से प्रताडि़त साहित्यकार अब दिनोंदिन लोकमंगल की दिशा में बढ़ेगा । कलाकार, कवि,

(More)…

 
 
© Rishichintan.org
credit