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काँटे से काँटा निकाला जाए (Let intellectualism have a taste of its own medicine !)

Published on January 8th, 2012

काँटे से काँटा निकाला जाए

धर्म की आवश्यकता आज अधिक है (The Religious Approach is Needed More Today than Ever before)

Published on December 20th, 2011

धर्म की आवश्यकता आज अधिक है

भूत, भविष्य और वर्तमान (Past, Future and Present)

Published on November 17th, 2011

भूत, भविष्य और वर्तमान परम्परा अतीत की देन होती है और परिवर्तन भविष्य का प्रतीक । मनुष्य का जितना सम्बन्ध वर्तमान से होता है, उतना भूत अथवा भविष्य से नहीं । मनुष्य को वर्तमान में ही जीना पड़ता है । अतीत का वैभव उसका कोई कार्य सम्पादित नहीं कर पाता और भविष्य के स्वप्न भी

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